हेल्लो दोस्तों | इस पोस्ट में मैं अपने केदारनाथ यात्रा से जुडी कुछ बातें करने जा रहा हूँ साथ ही कुछ फोटो और विडियो शेयर कर रहा हूँ जो मैने और मेरे दोस्तों ने इस यात्रा के दौरान लिए थे | तो मेरी यह यात्रा 04.11.2020 को चंडीगढ़ से शुरू हुई थी |
सुखना झील चंडीगढ़ सुखना झील के पास
तो हम दिन के करीब २ बजे चंडीगढ़ से देहरादून के लिए एक शेयर टैक्सी पर निकले थे | करीब 7.30 शाम को हम देहरादून पहुंचे और फिर देहरादून से करीब 9 बजे हमने ऋषिकेश के लिए बस से सफ़र शुरू किया | रात को 10.30 तक हम ऋषिकेश पहुच गए थे | और हमारे बाकि २ दोस्त गैरसैण में रुके हुए थे | फिर हमने रात को ऋषिकेश में ही रेस्ट किया और अगले दिन सुबह करीब 5 बजे हम निकल पड़े रुद्रप्रयाग की तरफ, इस रास्ते पर आपको हर तरह की गाड़ियाँ जैसे बस , शेयर टैक्सी और ट्रैवलर मिल जायंगी |
टिहरी डैम
रुद्रप्रयाग और इससे आगे श्रीनगर यहाँ से आगे आने वाले सफ़र में सबसे बड़े स्टेशन है , यहाँ आपको जरूरत का पूरा सामान आसानी से मिल जाएगा जैसे - कोई मेडिकल किट , ग्लूकोस या फिर खाने पीने की चीजें | इसके आगे यह सामान मिलना थोडा मुश्किल है और MRP से लगभग दुगुने में ही मिलेगा , क्योंकि आगे रास्ते काफी दुर्गम हैं और वहां पर सामान घोड़ों, खच्चरों और मजदूरों के द्वारा ढो के पहुचाया गया होता है | रुद्रप्रयाग में नास्ता करने के बाद हम बिना ज्यादा रुके गुप्तकाशी की तरफ निकल पड़े | यहाँ से बस कुछ 3 0 KM दूर आता ही सोनप्रयाग आता है जहाँ काफी होटल हैं और वहां से आप सुबह जल्दी केदारनाथ के लिए पैदल यात्रा शुरू कर सकते हैं , इसलिए हम गुप्तकाशी से सोनप्रयाग निकल पड़े | इस रास्ते पर भी आपको आसानी से हर समय गाड़ियां मिल जायंगी बस रात्री के समय गाड़ियाँ कम हैं क्योंकि रस्ते काफी जोखिम भरे हैं और आपको शायद गाड़ी पूरी बुक भी करनी पड़ जाए |
गुप्तकाशी से सोनप्रयाग रस्ते के बीच क्योंकि हम यह यात्रा नवम्बर में कर रहे हैं तो सामान्य बात है की ठंडा काफी ज्यादा है , सोनप्रयाग में रुकने की सुविधा आपको आसानी से मिल जाएगी | आपको केदारनाथ यात्रा से करने से पहले चारधाम यात्रा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है वरना आपको यात्रा करने से रोका जा सकता है | अगले दिन यानी 06.11.2020 की सुबह हमने सोनप्रयाग से गौरीकुंड जो की बस 6 KM है को टैक्सी से सफ़र करने के बाद करीब 8 बजे सुबह पैदल यात्रा शुरू करी | पैदल यात्रा के लिए हमने लाठी और गर्म दस्ताने ले लिए थे क्योकि ठण्ड काफी ज्यादा थी |
सोनप्रयागतो अब शुरू हुआ कुछ 16 KM के आसपास का पैदल सफ़र , शुरू में चलने की आदत न होने के कारण काफी थकान लग रही थी और सफ़र मुश्किल लग रहा था मगर फिर अपने चलने की स्पीड थोडा कम करी और रास्ते में आ रहे अद्भुत नजारों और नीबू पानी का मज़ा लेते लेते मैं और मेरे दोस्त करीब 8-9 घंटों में केदारनाथ मंदिर में पहुचे | इतने ज्यादा ऊंचाई पर जाकर मंदिर की झलक पाना शायद सबसे सुखद अनुभव था | मंदिर के पीछे धुप में चमकता चांदी सा हिमालय , यह नज़ारा हमेशा याद रहेगा | शाम की आरती देखना भी एक मन को शांत कर देने वाला अनुभव था | मंदिर के पास में आपको खाने की कुछ दुकाने और भंडारे मिल जायंगे | रात को रुकने के लिए मंदिर के 200 m की परिधि में होटल मिल जायंगे जो यात्रियों की अधिकता के कारण थोड़े महंगे मिल सकते है , मंदिर से करीब २-३ KM में बेस कैंप हैं जहाँ पर कम रेट में आपको अच्छी सुविधायें मिल जायंगी | हम रात को बेस कैंप में ही रुके| सुबह करीब 6 बजे उठ कर हमने ठन्डे जमा देने वाले पानी से नहाया , यह सबसे ज्यादा थ्रिल करने वाला था | इसके बाद हमने चाय वगेरह पिया , यहाँ पर आपको चाय थोड़ी सी महंगी जरूर लग सकती है पर इतने ठण्ड में चाय अमृत से कम भी नहीं लगेगी इस बात की गारेंटी है | अब हम निकल पड़े केदारनाथ मंदिर के दुबारा दर्शन और केदारनाथ मंदिर के पास ही 100 m और उपर बने हुए भैरव देवता के मंदिर में | भैरव देवता के मंदिर से केदारनाथ मंदिर का टॉप व्यू बहुत ही ज्यादा सुन्दर लगता है | यह पूरा इलाका जहाँ भी देखो स्वर्ग सा लगता है, हिमालय से घिरा हुआ और भक्तिमय |
अब कुछ देर यहाँ पर रुकने के बाद मंदिर में काफी भीड़ बढ़ चुकी थी हमने प्रसाद वगेरह लिया और मंदिर के बाहर से ही बाबा केदारनाथ को प्रणाम किया | मैं और एक दोस्त निकल पड़े मंदिर से गौरीकुंड की पैदल वापसी पर | करीब 4 घंटों में हमने 16 Km तय किये ( वापसी में )| अब हमने गौरीकुंड में एक गर्म पानी के कुंड के दर्शन किये और फिर हम वापस रुद्रप्रयाग आ गए| हम इस यात्रा में तुंगनाथ मंदिर के दर्शन भी करना चाहते थे लेकिन बर्फ़बारी से वह अपने सामान्य समय से पहले ही बंद हो चूका था | हमारे पास समय था इसलिए हमने ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग करने का मन बना लिया और अगले दिन हम सुबह सुबह रुद्रप्रयाग से सीधा ऋषिकेश आ गए | एक एजेंसी से बात करके हमने अपनी बुकिंग करी | ऋषिकेश में आपको ऐसी कई एजेंसी मिल जायंगी , या स्टेशन पर आते ही कोई न कोई ऑटो ड्राईवर और एजेंट आपको ना चाहते हुए भी बता ही देंगे | अब हमने 18 KM की लम्बी रिवर राफ्टिंग करी | यह सबसे रोमांचक था , ठन्डे पानी में राफ्टिंग और बहते हुए पानी में स्विमिंग करना बहुत ज्यादा जोश भरा हुआ होता है | मेरे लिए यह एक्सपीरियंस इसलिए भी खास हो गया क्योंकि मेरा स्विमिंग का डर निकल गया |
शाम को करीब 3 बजे रिवर राफ्टिंग ख़तम करने के बाद हम इस सफ़र के आखिरी पड़ाव पर यानी हरिद्वार गए | हरिद्वार में गंगा जी के घाट किनारे बैठके मन एक दम शांत और खुस हो गया | मैंने घर के लिए गंगाजल लिया और फिर करीब रात 9 बजे मैं और दोस्त अपने घर वापसी पर चल पड़े|
गंगा जी घाटकेदारनाथ जी और ऋषिकेश का यह सफ़र कुल 5 दिन का रहा जो की बहुत ही ज्यादा खुबसूरत और याद रहने वाला है |




















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