जाकिर खान - कॉमेडी सेंट्रल के 'इंडियाज बेस्ट स्टैंड अप कॉमेडियन' के विजेता एक उम्दा सितार वादक और, बहुत ही फेमस “सख्त लौंडा” |
जाकिर खान को कौन नहीं जानता।
एक
छोटे से शहर से आने और भारत में अग्रणी स्टैंड-अप कॉमेडियन बनने के लिए कॉलेज छोड़ने
वाले होने के नाते,
ज़ाकिर एक ऐसी सड़क पर सफलता के लिए अपना रास्ता बना रहा है,
जिस पर कई लोग चल नहीं पाए हैं।
हालांकि, बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि ज़ाकिर एक बहुत ही अच्छे शायर भी हैं। हमने आपके लिए उनकी कुछ शायरी निकालीं और उनके स्टैंड-अप की तरह हैं, दिल को छु लेने वाली और हमारी ही कहानी को बयाँ करने वाली |
हर एक कॉपी के पीछे कुछ न कुछ ख़ास लिखा है ,
कुछ इस तरह तेरे मेरे इश्क का इतिहास लिखा है |
तू दुनिया में चाहे जहाँ भी रहे ,
अपनी डायरी में मैंने तुझे अपने पास लिखा है
माना की तुमको इश्क़ का तजुर्बा भी कम नहीं,
हमने भी बाग़ में हैं कई तितलियाँ उड़ाई..
दोस्ती आइनों से कभी लम्बी चलती नहीं ,
इतनी इमानदारी भी रिश्तों के लिए अच्छी नहीं |
कामयाबी हमने तेरे लिए खुद को यूँ तैयार कर लिया,
मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया..
जिंदगी से कुछ ज्यादा नहीं,
बस इतनी से फरमाइश है,
अब तस्वीर से नहीं,
तफ्सील से मलने क ख्वाइश है..
हम दोनों में बस इतना सा फर्क है,
उसके सब “लेकिन” मेरे नाम से शुरू होते है
और मेरे सारे “काश” उस पर आ कर रुकते है..
उसे मैं क्या, मेरा खुमार भी मिले तो बेरहमी से तोड़ देती है,
वो ख्वाब में आती है मेरे, फिर आकर मुझे छोड़ देती है….
इश्क़ को मासूम रहने दो नोटबुक के आखिरी पन्ने पर,
आप उसे किताबो में डालकर मुश्किल न कीजिये..
तेरी बेवफाई के अंगारो में लिपटी रही हे रूह मेरी,
मैं इस तरह आज न होता जो हो जाती तू मेरी..
एक सांस से दहक जाता है शोला दिल का
शायद हवाओ में फैली है खुशबू तेरी
अब वो आग नहीं रही, न शोलो जैसा दहकता हूँ,
रंग भी सब के जैसा है, सबसे ही तो महेकता हूँ…
एक आरसे से हूँ थामे कश्ती को भवर में,
तूफ़ान से भी ज्यादा साहिल से डरता हूँ…
मेरे कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पुछुंगा तुमसे ,
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम …
मैं जानना चाहता हूँ की क्या रकीब के साथ चलते हुए शाम को यूं ही बेखयाली में
उसके साथ भी हाथ टकरा जाता है क्या तुम्हारा ?
क्या अपनी छोड़ी उँगली से क्या उसका भी हाथ थाम लेती हो तुम,
क्या वैसे ही जैसे मेरा थाम लिया करती थी ...?
किन बता दी सारी बचपन की कहानियाँ उसको ,
जैसे मुझे रात रात भर बैठ के सुनाई थी तुमने |
क्या तुमने बताया उसको के 30 के आगे की हिंदी की गिनती आती नहीं तुमको
…?
वो जो सारी तश्वीरें तुम्हारी पापा के साथ, तुम्हारी बहन के साथ
,जिनमे तुम मुझे बड़ी प्यारी लगी ,
क्या दिखा दी उसको भी तुमने ?......
के कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत की रोज़ पूछूँगा तुमसे ,
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम
के मै पुछना चाहता हूँ क्या जब वो भी घर छोड़ने आता है तुमको,
क्या सीढियों पे आंखे नीची करके मेरी ही तरह उसके सामने भी माथा सामने
कर देती हो तुम
वैसे ही जैसे मेरे सामने किया करती थी ?....
क्या सर्द रातों में बंद कमरों में वो भी मेरी तरह ,
तुम्हारी नंगी पीठ पर अपनी उँगलियों से हर्फ़ दर हर्फ़ खुद का नाम गोंद्ता
है,
और तुम भी अक्षर बा अक्षर पहचानने की कोशिश करती हो क्या, जैसे मेरे
साथ किया करती थी...?
के कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत की रोज़ पूछूँगा तुमसे ,
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके इस लायक नहीं हो तुम
बस का इंतज़ार करते हुए,
मेट्रो में खड़े खड़े
रिक्शा में बैठे हुए
गहरे शुन्य में क्या देखते रहते हो?
गुम्म सा चेहरा लिए क्या सोचते हो?
क्या खोया और क्या पाया का हिसाब नहीं लगा पाए न इस बार भी?
घर नहीं जा पाए न इस बार भी?
ज़िन्दगी से कुछ ज्यादा नहीं बस इतनी सी फरमाइश है ,
अब तस्वीर से नहीं, तफ्सील से मिलने की ख्वाइश है…
मैं शून्य पे सवार हूँ
बेअदब सा मैं खुमार हूँ
अब मुश्किलों से क्या डरूं
मैं खुद कहर हज़ार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
उंच-नीच से परे
मजाल आँख में भरे
मैं लड़ रहा हूँ रात से
मशाल हाथ में लिए
न सूर्य मेरे साथ है
तो क्या नयी ये बात है
वो शाम होता ढल गया
वो रात से था डर गया
मैं जुगनुओं का यार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
भावनाएं मर चुकीं
संवेदनाएं खत्म हैं
अब दर्द से क्या डरूं
ज़िन्दगी ही ज़ख्म है
मैं बीच रह की मात हूँ
बेजान-स्याह रात हूँ
मैं काली का श्रृंगार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
हूँ राम का सा तेज मैं
लंकापति सा ज्ञान हूँ
किस की करूं आराधना
सब से जो मैं महान हूँ
ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ
मैं जल-प्रवाह निहार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
Mera Sab bura bhi kehna,
Par aacha bhi sab batana.
Mai jau duniya se toh sabko
Meri dastaan sunana.
yeh bhi Batana Ki kaise
samandar jeetne se pehle,
Mai Na jaane kitni choti-choti
nadiyon se hazaaron bar haara tha.
Woh ghar Woh zameen deekhana,
Koi magrur bhi kahega toh tum
Usko shuruwat meri batana.
Batana safar ki dushwariya mere,
Taki koi jo Meri jaisi zameen se aaye
Uske liye nadi ki haar choti hi rahe.
Samsndar jeetne ka khawab
Uske dil aur dimag se na jaaye.
Par unse meri galatiya bhi mat chupana.
Koi poche toh bata dena ki
Mai kiss darje ka nakara tha.
Keh dena ki jhoota tha mai,
Batana ki kaise
zarurat par kaam na aa saka.
Wade kiye par nibha na saka.
Intqaam saare poore kiye
par ishq adhura rehne diya.
Bata dena sabko ki,
mai matlabi bada tha.
Har bade mukaam pe
tanha hi mai khada tha.
Mera Sab bura bhi kehna,
Par aacha bhi sab batana.
Mai jau duniya se toh sabko
Meri dastaan sunana.
यूँ तो भूले है हमे लोग कई,
पहले भी बहुत से
पर तुम जितना कोई उनमे से याद नहीं आया..
बेवजह बेवफाओं को याद किया है,
गलत लोगो पर बहुत बर्बाद किया है.
अब कोई हक़ से हाथ पकड़कर महफ़िल में दोबारा नहीं बैठाता,
सितारों के बीच से सूरज बनने के कुछ अपने ही नुकसान हुआ करते है..
वो तितली की तरह आयी और ज़िन्दगी को बाग कर गयी
मेरे जितने भी नापाक थे इरादे, उन्हें भी पाक कर गयी।
अपने आप के भी पीछे खड़ा हूँ में,
ज़िन्दगी , कितने धीरे चला हूँ मैं…
और मुझे जगाने जो और भी हसीं होकर आते थे,
उन् ख़्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूँ मैं….
ये सब कुछ जो भूल गयी थी तुम,
या शायद जान कर छोड़ा था तुमने,
अपनी जान से भी ज्यादा,
संभाल रखा है मैंने सब,
जब आओग तो ले जाना..
जिस गुलदान को तुम आज अपना कहते हो ,
उसका फूल एक दिन हमारा भी था ,
वो जो अब तुम उसके मुख़्तार हो तो सुन लो ,
उसे अच्छा नहीं लगता ,
मेरी जान के हक़दार हो तो सुन लो ,
उसे अच्छा नहीं लगता !
वो जो अब तुम उसके मुख्तार हो तो सुन लो ,
उसे अच्छा नहीं लगता ,
मेरी जान के हक़दार हो तो सुन लो ,
उसे अच्छा नहीं लगता ,
कि वो जो ज़ुल्फ़ बिखेरे तो बिख़िरी न समझना ,
अगर माथे पे आ जाए तो बेफ़िक्री न समझना ,
दरअसल उसे ऐसे ही पसंद है ,
उसकी आज़ादी , उसकी खुली ज़ुल्फ़ों में बंद है !
जानते हो वो अगर हज़ार बार जुल्फें न सवारे तो उसका गुज़ारा नहीं होता ,
वैसे दिल बोहोत साफ़ है उसका इन हरकतों में कोई इशारा नहीं होता .
खुदा के वास्ते , खुदा के वास्ते उसे कभी रोक न देना ,
उसकी आज़ादी से उसी कभी टोक न देना ,
अब मैं नहीं तुम उसके दिलदार हो तो सुन लो ,
उसे अच्छा नहीं लगता.!!
इश्क का हासिल और जमा –
6 Hair bands.
4 alag alag tarah ki baalon wali Clips.
Woh... uss din jo sandal tuti thi tumhari, Uska Ek strap.
Aur haan Woh kitaab jiske panne mod kar diye they tumne.
Sambhal rakha hai maine sab,
Jab aaogi toh le jaana.
Waise chote bade mila kar,
kuch 23 kapde bhi pade hai tumahre.
Unme se, kuch me tum bala ki haseen lagi.
jaise woh red wala top aur Black wali dress.
Woh baby pink crop top aur woh green jump suit.
Sab yahin pada hai.
toh mai bas yeh keh raha tha ki
kharid lena na waisa sa hi kuch kahi se.. kyunki,
Sach kahu toh Lautane ka Dil nahi karta mera.
Nahi Nahi Mazak kar raha hoon,
Sambhal rakha hai maine sab,
Jab aaogi toh le jaana.
Waise kuch hisab bhi dena tha tumko,
Jo tumhari meri Tasveer wala,
Coffee mug diya tha tumne.
Uska handle tut gaya hai mujhse.
Blue wali shirt bhi pichhle 2 hafton se,
Mil nahi rahi hai kahin par aur..
Perfume khatam ho gaya hai.
Ghadi khoyi nahi hai par band ho gayi thi.
Isliye utar rakhi hai, bas bata raha hoon tumhe.
Woh Green wali check shirt dhobi ne jala di.
Woodland wale joote Zeeshan le gaya.
tumhare diye Earphones aur Chashma,
ek din Airport par jaldbaazi me chhut gaye.
bahut dhunda, nahi mile.
Par, Woh sukha hua Gulaab ke phoolo ka guladasta.
tumhari lipstick ke nishaan wala paper cup.
Woh tissue paper jis par tumne number likh kar diya tha,
tumhari car parking ki parchiyaan.
Woh toote hue clutcher ke dono hisse.
tumhare mor pankh wale jhumke.
Aur mai....
yeh sab kuch jo bhool gayi thi
tum,
ya shayad jaankar chhoda tha tumne.
Apni jaan se bhi jayada,
Sambhal rakha hai maine sab,
Jab aaogi toh le jaana.
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